गुलाबी खुशबूएँ
कुछ खुशबूएँ ,
गुलाबी रंग की,
बिखेर दी तुमने ,
बेसुध खिलकर...
.
कुछ हवाओं मै बिखर गई,
कुछ गुलाबी ठंड बन गई,
तुम खिलकर,
मौसम पर छा गए...
मैं ज़मी से तुम्हें ,
देखता रहा,
दिन भर,
सिर्फ रात के इंतजार में ...
क्योंकि रात मे,
ओंस गिरती है ,
चंद कतरे,
तुम्हारी खुशबू के लेकर...
भिगा देती है मुझे ,
गुलाबी रंग से सराबोर,
सर्द रात में,
तुम्हारी खुशबू,
बस और कुछ नहीं..
.
......मयंक
गुलाबी रंग की,
बिखेर दी तुमने ,
बेसुध खिलकर...
.
कुछ हवाओं मै बिखर गई,
कुछ गुलाबी ठंड बन गई,
तुम खिलकर,
मौसम पर छा गए...
मैं ज़मी से तुम्हें ,
देखता रहा,
दिन भर,
सिर्फ रात के इंतजार में ...
क्योंकि रात मे,
ओंस गिरती है ,
चंद कतरे,
तुम्हारी खुशबू के लेकर...
भिगा देती है मुझे ,
गुलाबी रंग से सराबोर,
सर्द रात में,
तुम्हारी खुशबू,
बस और कुछ नहीं..
.
......मयंक



