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Thursday, October 25, 2018

गुलाबी खुशबूएँ




गुलाबी खुशबूएँ

कुछ खुशबूएँ , 
गुलाबी रंग की,

बिखेर दी तुमने ,
बेसुध खिलकर...
.
कुछ हवाओं मै बिखर गई,
कुछ गुलाबी ठंड बन गई,
तुम खिलकर,
मौसम पर छा गए...

मैं ज़मी से तुम्हें ,
देखता रहा,
दिन भर,
सिर्फ रात के इंतजार में ...

क्योंकि रात मे,
ओंस गिरती है ,
चंद कतरे,
तुम्हारी खुशबू के लेकर...

भिगा देती है मुझे ,
गुलाबी रंग से सराबोर,
सर्द रात में,
तुम्हारी खुशबू,
बस और कुछ नहीं..

.
                            ......मयंक

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