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Sunday, September 8, 2019

ISRO we are proud of you


A small poem written for isro scientists who have put there efforts in chandrayaan 2 project ,
however due to a small glitch the moon lander was failed. here you can see our respected prime minister shri Narendra Modi is consoling the scientist after the failure..

this is to motivate the hardworking scientists of or country India.

जय हिन्द !  वन्दे  मातरम !

वक्त कठिन है धैर्य धरो 
देश तुम्हारे साथ है,



Sunday, July 28, 2019

रात और दिल



रात और दिल 

एक अकेली खूबसूरत रात , और एक तन्हा  दिल,
ये सांसों में चाँद की ठंडक , और सीने  में जलता दिल .. 
रात की रानी की सौंधी महक , और एक बेक़रार दिल 
ये अँधेरे में  तारों की चमक ,  और एक बुझा दिल.... 

ये झिंगुरों की बाते सुनता, शांत बैठा एक दिल,
अपनी परछाइयों के साथ , अँधेरे कोने में जुगनू सा दिल,,,
ये अपनी सांसों से , सीने में ,ओस भरता , भीगा हुआ दिल,
ये दुनिया से दूर , दिल लगाता , छोटा सा एक दिल,

ये सोये हुए फूलो को देखकर , महकता सा एक दिल,
लेटा हुआ , चांदनी रात में , चाँद को निहारता  दिल,
ये थमें हुए पल मे , उड़ता हवाओँ में  एक दिल,
हर कोई सो रहा , पर जागते हुए , खो रहा एक दिल.... 

ये अपनी धुन में , अँधेरी रात में , टहल रहा एक दिल ,
खाली रास्तों पर ,  न जाने क्या , ढूंढ़ता सा एक दिल ,
ये अपने लम्बे सायों को, साथ लेकर चल रहा एक दिल,
ये अपने दिल को समझाता , जिद्दी सा , पागल दिल....  

                                                              ..... मयंक दुबे 
                                                                          28 /07 /2019 

English translations: 

night and heart 
a beautiful alone night , and a solitary heart..
cool breaths of moon  and a burning heart in chest..
aroma of jasmine, and a desperate heart,
shining of stars in the dark night and a broken heart...

listening to noise of night bugs, a calm heart,
sitting with its shadows, in a corner , an alone heart, 
filling with its breaths , the dew in his chest, a heart,
far away from this world , a loving, tiny heart...

watching the sleeping flowers, a heart full of fragrance ,
lying in a full moon night and watching the beauty of moon,,
in this freezed time, a flying heart..
when everyone is sleeping, an awaken, lost heart..

in its own world, in night,a  strolling heart..
in empty streets , don,t know, but searching something a desperate heart..
long shadows are walking with this heart..
a heart consoling ,his mad, stubborn heart..

Thursday, October 25, 2018

गुलाबी खुशबूएँ




गुलाबी खुशबूएँ

कुछ खुशबूएँ , 
गुलाबी रंग की,

बिखेर दी तुमने ,
बेसुध खिलकर...
.
कुछ हवाओं मै बिखर गई,
कुछ गुलाबी ठंड बन गई,
तुम खिलकर,
मौसम पर छा गए...

मैं ज़मी से तुम्हें ,
देखता रहा,
दिन भर,
सिर्फ रात के इंतजार में ...

क्योंकि रात मे,
ओंस गिरती है ,
चंद कतरे,
तुम्हारी खुशबू के लेकर...

भिगा देती है मुझे ,
गुलाबी रंग से सराबोर,
सर्द रात में,
तुम्हारी खुशबू,
बस और कुछ नहीं..

.
                            ......मयंक

Monday, October 22, 2018

#meetoo






"Meetoo"


क्यों जिए भय मे वो ?
बढे आगे बना , सागर मे सेतू,
.
महिषासुर को वही मारे, 
ना हो किंतु परंतु,
.
हर नारी में बसे अगर,
शक्ति बन तू,
.
ना कहना पड़े ,
वर्षों बाद उसे ,
#meetoo

                                                ...... मयंक दुबे 

English translation:

why she will live with fear?
she will lead by making a bridge in ocean,
she will kill the demon instantaneously,
without a second thought,
if only you are present in te heart of,
every women , as a power,
she will not say,
after many years,
#meetoo.






Thursday, October 11, 2018

गिर कर भी




ख़ुशबुए

इतनी ख़ुशबुए थी तेरे साथ,,

 आसमानो में कही.... 

की ज़मी पर गिर कर भी ,

महक़ जाती नहीं ...


                             मयंक दुबे  

English translation: 

There were so many fragrances ,
when I was with you in the skies,

that even after falling down,
i am having those fragrances with me..

Tuesday, October 2, 2018

रास्ते


चलो कहीं चलते हैं.... 
ये रास्ते कहाँ जाते है  ?

मंजिलो के ख्वाब दिखाते है... 
ये रास्ते कहीं तो जाते हैं. 

                                       मयंक




Sunday, September 30, 2018

ख़ुशी



ख़ुशी 

दिल ने ख़ुशी को ढूँढना चाहा 
मै घर से निकला , राह पर कुछ आगे बढ़ा ,
एक छोटा बच्चा ,खेलता हुआ मिला,
और खोज ख़त्म हो गयी,,,,

English translation:

"Happiness"

my heart wanted to search happiness"
i left the home , on my way ,
I found a small child playing,
my search was over... 

Tuesday, September 18, 2018

अनजान


अनजान..


पीपल का सुंदर गुलाबी पत्ता ,,
अपना नव रूप लेकर इस दुनिया में आया,,
एक सुंदर सौम्य रंग से जीवन की शुरुआत,,
 अपने विशाल वृहद रूप से अनजान..
.
और कुछ वर्षों बाद..
.
एक पुराने बड़े हरे पत्ते में बदल जाएगा ,,
जो मिलकर एक विशाल पीपल का वृक्ष बनाएंगे
सीना चौड़ा कर बोझ उठाकर, आंधियों से लड़ेंगे
अपने सौम्य बचपन से अनजान..

English translation:

Ignorant

A beautiful pink leaf of peepal tree,
has come into this world with its new form,
what a beautiful start with a mild beautiful color,
ignorant of its future big & large life!

and after some years..

it will transform into big green old leaf,
which will collectively form a grand peepal tree,
will face the storms with valor and courage,
ignorant of its beautiful mild childhood.

Saturday, September 8, 2018

"बेटी का साया "


"बेटी का साया "

हथेली के बराबर सी है  तू, छोटी सी रुई का गोला सी,
गोदी में ले , सीने से लगाया है , अलसायी नन्ही जान सी,
अपने छोटे हाथो की मुट्ठी से तूने , मेरी छोटी ऊँगली को पकड़ा है ,
पिघल गया हू  इस घडी, पत्थर मै , पिता बनने का सुख पाया है ,
खुशकिस्मत हूँ , ज़िन्दगी में मेरी , बेटी का साया आया है. 

नन्हे कदमो से तू, चलन लगी है, चाबी भरी गुड़िया सी,
कसकर तेरे हाथ पकड़कर, साथ भागता हूँ, तू भागती है शैतानी पुड़िया सी,
गिर न जाए तू, जिगर मुँह में रहता है,
हंसी तेरी , रोने में ना बदले , फ़िक्र में रहता हैं ,
खुशकिस्मत हूँ , ज़िन्दगी में मेरी , बेटी का साया आया है. 

फ्रॉक पहनकर , गोल घुमकर , पूछना तेरा, पापा लग रही हू  कैसी ?
क्या बताऊ गुड्डा, तारे बिखरे हो, बीच में  तू चाँद जैसी. ,
तेरे बालो को गुथकर , दो छोटी बना , तेरी माँ ने जो सजाया है,
सच में ,तुझे देखकर, हर जहा का सुख , मैंने पाया है ,
खुशकिस्मत हूँ , ज़िन्दगी में मेरी , बेटी का साया आया है.

छोटी छोटी ज़िद तेरी, छोटे से तेरे मुख से, सुन लेता,
पर दिल मेरा ,तेरी आँखों के टिमटिमाने पैर रहता,
हठ तू करती , मुस्कान अपनी छुपाकर, तेरी हर ज़िद पूरी है,
कुटिल तेरी मुस्कान, झूठा हठ, सब समझ आया है,
खुशकिस्मत हूँ , ज़िन्दगी में मेरी , बेटी का साया आया है.

खेलते ,खिलते, इश्वर , परीक्षा ले लेता,
वर्षो का भरोसा पल भर में टूटता , जो बीमार तुझे वो कर देता,
बुखार से तपती , नन्ही देह तेरी, दिल मेरा रोता  है.
तेरी हर तकलीफ को मैंने , इश्वर से माँगा है,. 
खुशकिस्मत हूँ , ज़िन्दगी में मेरी , बेटी का साया आया है.

तीन बरस की काया तेरी,पर संसार तुझे देखना है,
इसलिए तो गुड्डा तुझे , पापा ने तेरे , कंधे पे बिठाया है,
आतुर तेरी आँखों को, हर दृश्य, विस्मित करता है,
कंधे पैर बैठी , गौरव मेरा, सबको हर्षित करता है। 
खुशकिस्मत हूँ , ज़िन्दगी में मेरी , बेटी का साया आया है.
  
 पांच बरस की गुड्डा  तू, स्कूल जाया करती है,
मेरे सिखलाये पाठ तू , मुझे पढ़ाया करती है ,
टीचर टीचर खेल में , तेरी क्लास का में बच्चा बनता हूँ,
छड़ी से मार खा के भी , मन मेरा हसता   है,
खुशकिस्मत हूँ , ज़िन्दगी में मेरी , बेटी का साया आया है.

छड़ी लगने का नाटक कर , जो मै रोता हूँ ,
छड़ी पटककर , तू मुझे , प्यार से पुचकारती है,
छोटे छोटे हांथो से सेहला , प्यार मुझे दिखलाती है,
हर रोज़ ये छड़ी वाली, मार ,अब दिल खाना चाहता  है ,
खुशकिस्मत हूँ , ज़िन्दगी में मेरी , बेटी का साया आया है.

पापा मुझे छोड़ोगे तो नहीं ? एक दिन, ऐसे ही ,तूने पूछा था,
उस दिन तुझे , गले लगाकर , वचन तुझसे ये किया था,
जब तक सांसो की माला है, इस देह में जब तक , प्राण रहेगा,
हृदय के आखिरी स्पंदन तक, बेटी तेरे साथ , ये पिता रहेगा,
खुशकिस्मत हूँ , ज़िन्दगी में मेरी , बेटी का साया आया है.

बेटी पराया धन, कहती दुनिया, छोड़ मुझको चले जाना,
इन व्यर्थ सामाजिक ढकोसलो का, हसकर मखौल है उड़ाना,
रिश्ता लहू का , बाप बेटी का, ईश्वर ने सुढृढ़ बनाया है,
मार तमाचा समाज को, बेटियों ने ,आसमान में घर बनाया है,
खुशकिस्मत हूँ , ज़िन्दगी में मेरी , बेटी का साया आया है.

शोभा बने तू , किसी भी आंगन की, बाग़ की मेरे कली रहेगी,
रहे किसी भी घर में तू, पिता के दिल में , हमेशा रहेगी,
तू बेटा होती , तो भी तुझे , जाने से , न रोक पाता मै ,
प्रगति चक्र में ,बढ़ने को , हर पिता ने नन्हे कदमो को ,आगे बढ़ाया है,
खुशकिस्मत हूँ , ज़िन्दगी में मेरी , बेटी का साया आया है.

छत पर बैठ रोज़ मै , अपनी नन्ही चिड़िया की उड़ान देखूंगा,
मिल ना पाउ , चाहे रोज़ाना, फ़ोन तो हर दिन किया करूँगा,
प्रकृति का नियम ये, बच्चो को एक दिन उड़ जाना,
पक्षियों ने भी क्या, अपने बच्चो को, उड़ना सिखाया है?
खुशकिस्मत हूँ , ज़िन्दगी में मेरी , बेटी का साया आया है.

तू इतना उचा उड़ , मेरी गुड्डा, दुनिया तुझे छोटी नज़र आये,
ये समाज , रीति, रिवाज़ो,के बंधन , तुझे कभी जकड न पाए,
है पिता तेरा, तेरे पीछे, बन शक्ति तेरी, तू बस पंख पसार उड़ जाना ,
उन्मुक्त उड़ान का सुख लेना , हर बेटी को दिखला देना,
हर पिता को , एहसास कराना है,
खुशकिस्मत हैं वह , ज़िन्दगी में जिसके  , बेटी का साया आया है.

लेखक : मयंक दुबे (अपनी बेटी मायशा दुबे के लिए )



ज़िन्दगी, मै , ऐसा तो नहीं


"ज़िन्दगी,  मै , ऐसा तो नहीं "

लक्ष्यविहीन जागकर , घूमता हुआ बुत सा,
कुछ खोखला, बोझिल , भागता , रुक कर सा,
कुछ ढूंढता पलो में , खोया हुआ जीवन सा ,
तन मे ढूढ़ता , मन को, मन मिलता ही नहीं,
ज़िन्दगी मै ऐसा तो नहीं। .. 

अंदर झांक कर देखा ,पाया  शोरगुल सा 
निराकार  दानव, बैठा , पत्थर सा,
न बैचेनी , न उन्माद, दिशाहीन सा,
कानो को हाथ से दबाता , शांति मिलती नहीं,
ज़िन्दगी मै ऐसा तो नहीं। ..... 

परतो में दबा  कोई , इंसान खुद ही सा,
निकल नहीं पा रहा , परतो का नहीं कोई छोर सा,
सोया है , या मर गया, दबा कोई मलबे सा,
करता दिल से बाते, जवाब मिलता ही नहीं,
ज़िन्दगी मै ऐसा तो नही ,,

चाँद , तारे, रात , सब शांत हो गया ,
मिटटी की खुशबु, फूलो का रंग , धुआँ हो गया,
ये गुजरता सा एक लम्हा हैं , या जीवन का एक पड़ाव,
डूबना चाहता हु, गहरायी मिलती नहीं ,
ज़िन्दगी मैं ऐसा तो नहीं। . 

अब क्या करना है?
इस दिल पे चढानी  है, नए रंग की परत सी,
मन की परते खोल, ख्याल लेंगे अंगड़ाई सी,
इस उथल पुथल में , मिल रही शांति सी,
खुद को खोकर , खुद ढूंढ पाया ही नहीं,
ज़िन्दगी मैं ऐसा तो नहीं ,,,

खुद दिखा रहा , भटके मन को नयी राह सी,
जो बढ़ चले सूखे रेगिस्तान में , अजीब मृगतृष्णा सी,
जो  बस खो जाये , भागे , बना खुद अपनी राह सी,
दौड़ता रहे, जब तक , बचे आखिरी साँस सी,
अंत को सामने पाकर , मुस्कुराये भी नहीं ,
ज़िन्दगी मैं ऐसा तो नहीं ,,,

  English translation;

"Life, I'm not like that"

goalless, wondering here and there mummified,
emptiness and heavy, I run but , something stops me,
searching something meanwhile, life may be,
finding soul in my body, but its soulless!
life, i'm not like that...

searching within I find lot of noise,
shapeless demon, have sat within, like rock,
no restlessness, no zeal, being directionless,
pressing my palms on my ears, but not finding peace,
 o life, i'm not like that..

someone is buried inside, and looks like me,
not able to rescue it, not finding where to start?
either it is sleeping, or dead, like debris,
talking to heart, but no answers are found.
o life, i'm not like that...

moon, stars , night , all are silently watching,.
color of flowers, mud's fragrance, is lost,
It is just a passing moment , or life's milestone?
wanted to sink, but, couldn't find depths,
o life, i'm not like that...

 what to do?

have to paint a new layer of color, on heart,
my soul will soon be free,
this ruckus is giving me peace, actually,
I've lost myself, not able to find again
o life , I'm not like that...

I myself am giving directions to my lost soul,
which is advancing in this desert, its a craving,
wanted to be lost, to run, on roads of its own,
want to run till the last breath,
to stare in the eyes of death , and not smiling..
o life, I'm not like that...

Written on : January 2018, talking to myself and convincing.